rehmat.re रहमत (जुलाहा) की शायरी

Authorrehmat

मुसव्विर जो नहीं थे हम, तो तेरी तस्वीर कैसे बनाते.

मुसव्विर जो नहीं थे हम, तो तेरी तस्वीर कैसे बनाते.
हम जितने भी आईने लाए, सब में बस तू निकला.
जानाँ हमने तेरी याद में, तुझसे बेवफ़ा हो कर भी देखा.
तसव्वुर में जितने घूँघट उठाए, सब में बस तू निकला.
– रहमत (जुलाहा)

#shayari #love #friendship #julaha #beautiful #dil #jaan #ishq

तेरे कान की झुमकी, अजब तमाशा करे.

तेरे कान की झुमकी, अजब तमाशा करे.
तू जान डाल कर मुझमें, मुझे तराशा करे.
हल्की सी चले हवा, तो ज़ुल्फ़ ऐसे लहराए.
मेरे दिल की धड़कन, मुझे तलाशा करे.
– रहमत (जुलाहा)

#shayari #love #friendship #julaha #beautiful #dil #jaan #ishq

जितने भी हमदर्द हैं मेरे, तुमसे दूर ठीक हो रहा हूँ मैं.

जितने भी हमदर्द हैं मेरे, तुमसे दूर ठीक हो रहा हूँ मैं.
अब के दवाएँ जितनी लाओ, थोड़ी ज़्यादा लाना.
मुझसे मीठा बोलने वालों, मैं तुम्हें दुआएँ दूँगा.
इस बार जो ज़हर ले के आओ, तो थोड़ा ज़्यादा लाना.
………………………………
– रहमत (जुलाहा)

#shayari #life #julaha #people

हम अपनी अच्छी आदतों में अब किसी से दिल नहीं मिलाते.

हम अपनी अच्छी आदतों में अब किसी से दिल नहीं मिलाते.
मशवरा देते हैं मिलते रहने का बस मिल नहीं पाते.
– रहमत (जुलाहा)

#shayari #life #julaha #people

कोई आगे या पीछे कि पहले कौन जाए.

कोई आगे या पीछे कि पहले कौन जाए.
मैं दुआ में ज़मीन ओ आसमाँ को बता कर रखूँगा.
तू मुझसे पहले जाए तो रोशन कर देना.
मैं तुझसे पहले जाऊँ तो जन्नत सजा कर रखूँगा.
– रहमत (जुलाहा)

#shayari #love #friendship #julaha #beautiful #dil #jaan #ishq

rehmat.re रहमत (जुलाहा) की शायरी
Rehmat Ullah - रहमत (जुलाहा)