rehmat.re रहमत (जुलाहा) की शायरी

माथे पर बोसा देकर छूटे ही थे मेरी जान.

म

माथे पर बोसा देकर छूटे ही थे मेरी जान.
आज फिर तेरी नथ के नीचे आकर अटक गए.
– रहमत (जुलाहा)

#shayari #love #friendship #julaha #beautiful #dil #jaan #ishq

About the author

Add comment

Avatar photo By rehmat
rehmat.re रहमत (जुलाहा) की शायरी
Rehmat Ullah - रहमत (जुलाहा)