rehmat.re रहमत (जुलाहा) की शायरी

अब सुकून से सोने की ख़ातिर लेट ना सके.

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अब सुकून से सोने की ख़ातिर लेट ना सके.
वो वहाँ भी याद आया जिसकी ख़ातिर दम निकला.
– रहमत (जुलाहा)

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Rehmat Ullah - रहमत (जुलाहा)