rehmat.re रहमत (जुलाहा) की शायरी

अंधेरों में दो पल बैठकर बताते हैं एहसान वो क्या जानें रहमत.

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अंधेरों में दो पल बैठकर बताते हैं एहसान वो क्या जानें रहमत.
कितनी रातें जाग कर हमने हक़ के कितने उजाले लुटाए.
– रहमत (जुलाहा)

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Rehmat Ullah - रहमत (जुलाहा)