rehmat.re रहमत (जुलाहा) की शायरी

कैसी ख़ुशी में मुबतिला है ये मासूम दिल.

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कैसी ख़ुशी में मुबतिला है ये मासूम दिल.
आधी रात को क़सीदे पढ़ता है ख़्वाबों में दीदार के लिए.
– रहमत (जुलाहा)

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Rehmat Ullah - रहमत (जुलाहा)