ख़ंजर भी खाएँ और ये ग़मख़्वारी. By rehmatFebruary 4, 2025Add comment ख ख़ंजर भी खाएँ और ये ग़मख़्वारी. लोगों ने रहमत ज़ख़्म भी दिये, तज़वीर भी दी. ग़मगीनी ए दिल और फिर हाजत बरारी. ख़ुदा ने रहमत नाम भी दिया, तासीर भी दी. – रहमत (जुलाहा) #shayari #life #julaha #people FacebookX