rehmat.re रहमत (जुलाहा) की शायरी

ना बरकत रहे फ़ज़्र की, ना सब्र रहे काम पर.

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ना बरकत रहे फ़ज़्र की, ना सब्र रहे काम पर.
ना दिन में जगे उल्लू, ना चमगादड़ सोए रात भर.
– रहमत (जुलाहा)

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Rehmat Ullah - रहमत (जुलाहा)