rehmat.re रहमत (जुलाहा) की शायरी

सुन लो सारे फ़रियाद हमारी, दो पाटों में दुनिया बेचारी.

स

सुन लो सारे फ़रियाद हमारी, दो पाटों में दुनिया बेचारी.
समझदार बचाए अपनी इज़्ज़त, निकम्मा दबाए दौलत सारी.
और मिले नहीं ख़यालात औलाद ओ औरत पे भी हमारे.
खुद्दार निभाए ज़ुबान अपनी, अय्याश बदले बारी बारी.
– रहमत (जुलाहा)

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Rehmat Ullah - रहमत (जुलाहा)