rehmat.re रहमत (जुलाहा) की शायरी

निर्मल पंछी छड़ काग भए, रहमत कागा रहा ना कोय.

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निर्मल पंछी छड़ काग भए, रहमत कागा रहा ना कोय.
गिद्ध तरतीब लग डागला, चमड़ी नौंच खौंच के सोय.

– रहमत (जुलाहा)

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Rehmat Ullah - रहमत (जुलाहा)